
रायपुर। राजधानी रायपुर के पुराने सर्किट हाउस में राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक आयोजित की गई। खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद की अध्यक्षता में हुई बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के खनिज अन्वेषण कार्यों की समीक्षा की गई और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खनिज खोज कार्यक्रमों एवं प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया गया।
बैठक में विशेष सचिव एवं संचालक भौमिकी-खनिकर्म रजत बंसल, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के उप महानिदेशक अमित धरवाड़कर सहित केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों तथा निजी उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
45 अन्वेषण परियोजनाओं को मिली मंजूरी
राज्य में कुल 45 नई एवं जारी खनिज अन्वेषण परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें 35 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक खनिज ब्लॉक, 4 डीप-सीटेड खनिज ब्लॉक और 6 बल्क मिनरल परियोजनाएं शामिल हैं।
इनमें से 25 परियोजनाओं का संचालन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रायपुर इकाई द्वारा किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर और 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क संसाधनों की पहचान एवं स्थापना की गई।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म द्वारा 11 अन्वेषण प्रस्तावों को भी अंतिम रूप दिया गया है। इनमें ग्रेफाइट, चूना पत्थर, लौह अयस्क, ग्लॉकोनाइट, आरईई एवं रेयर मेटल्स, बॉक्साइट तथा एल्युमिनस लेटराइट से जुड़े खनिज ब्लॉक शामिल हैं।
खनन से राज्य को मिला 16,738 करोड़ रुपये का राजस्व
सचिव पी. दयानंद ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य को खनन रॉयल्टी एवं राजस्व से लगभग 16,738 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि इसी अवधि में स्वीकृत एनपीईए की 9 अन्वेषण परियोजनाएं चालू वित्तीय वर्ष में भी जारी रहेंगी।
इन परियोजनाओं से महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों की खोज को लगातार गति मिलने के साथ प्रदेश के खनिज संसाधन आधार को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
लिथियम और दुर्लभ खनिजों की खोज पर विशेष जोर
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत प्रस्तावों में लिथियम, ग्रेफाइट, टिन-टैंटलम-नियोबियम, आरईई एवं रेयर मेटल्स, ग्लॉकोनाइट और बॉक्साइट जैसे महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों को शामिल किया गया है।
बैठक में दक्षिण बस्तर क्षेत्र में खनिज अन्वेषण गतिविधियों को तेज करने तथा जमीन की अधिक गहराई में मौजूद खनिजों के सटीक आकलन के लिए आधुनिक एवं उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र सौंपे
बैठक के दौरान भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा छत्तीसगढ़ के पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र खनिज साधन विभाग को सौंपे गए।
बैठक में राज्य में खनिज खोज की संभावनाओं को बढ़ाने, केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा खनिज आधारित उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप मजबूत रोडमैप तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, भारतीय खान ब्यूरो, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च, केंद्रीय भूजल बोर्ड, CMPDIL, MOIL, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इसके अलावा CGCOST, अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों तथा जिंदल स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, मां कुदरगढ़ी स्टील प्राइवेट लिमिटेड, डेक्कन गोल्ड और माइकी साउथ माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।



